माँ के आंचल का किनारा पकड़ कर चलता जा रहा हु मैं !
अनदेखे , अनसुने ख्वाबो को बुनता जा रहा हु मैं !!
रेत पड़ जाये अगर आँख मे कभी !
तेरी बनाई हुई राहों पर चला जा रहा हु मैं !!
माँ भी है तू , दोस्त भी तू , भगवान भी तू है !
मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सम्मान भी तू है !!
लगन भी तू , फ़र्ज़ भी तू और हौसला भी तू है !
मेरी हर सोच की निर्माता भी तू है !!
तू ही दुर्गा , तू ही काली, तू ही सरस्वती है माँ !
ज़िंदगी के हर पल से कई गुना बढ़ कर है मेरी माँ !!
तेरी गोद मे सिर रख लू , तो छू लेता हु आसमान !
तेरी आंचल की छाओं मे , मिल जाता है मुझे जहान !!
तेरे विश्वास से ही मै और मेरी मजबूती है !
तू ना हो तो ना आसमान , ना धरती मेरी है !!
कण कण मे समाई है माँ तू , तू ही दिलो दिमाग मै !
तेरी आस्था के चर्चे अब है पूरे सांसार मै !!
जिनकी माँ नहीं , उसकी माँ तू है !
जिसके सिर पर हाथ तू रख दे , महान है वो !!
माँ के आंचल का किनारा ....... !
अनदेखे , अनसुने ख्वाबो .......!!
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