लब्जो को दबा कर हर सोच को उड़ान दी है मैंने !
दिल मे छुपे अरमान को पनाह दी है मैंने !!
कब मेरा दिमाग मेरा साथ ना दे ये पता नहीं जनाब !
बस इस दिल को हर एक चीज़ की इजाजत मैंने !!
क्या पता राहे किस मोड़ पर छोड़ दे अकेला मुझको !
हर मोड़ को सीधे रास्ते से जोड़ दिया है मैंने !!
मैं चल रहा हु आपने अंतिम दिन के लिए राह मे !
हर एक खुशि को बटोर लिया है मैंने !!
लब्जो को दबा कर हर।
दिल मे छुपे अरमान को पनाह दी है मैंने।।
दिल मे छुपे अरमान को पनाह दी है मैंने !!
कब मेरा दिमाग मेरा साथ ना दे ये पता नहीं जनाब !
बस इस दिल को हर एक चीज़ की इजाजत मैंने !!
क्या पता राहे किस मोड़ पर छोड़ दे अकेला मुझको !
हर मोड़ को सीधे रास्ते से जोड़ दिया है मैंने !!
मैं चल रहा हु आपने अंतिम दिन के लिए राह मे !
हर एक खुशि को बटोर लिया है मैंने !!
लब्जो को दबा कर हर।
दिल मे छुपे अरमान को पनाह दी है मैंने।।