Sunday, September 11, 2016

उड़ान (Udaan)

लब्जो को दबा कर हर सोच को उड़ान दी है मैंने !
दिल मे छुपे अरमान को पनाह दी है मैंने !!

कब मेरा दिमाग मेरा साथ ना दे ये पता नहीं जनाब !
बस इस दिल को हर एक चीज़ की इजाजत  मैंने !!

क्या पता राहे किस मोड़ पर छोड़ दे अकेला मुझको !
हर मोड़ को सीधे रास्ते से जोड़ दिया है मैंने !!

 मैं  चल रहा हु आपने अंतिम दिन के लिए राह  मे !
हर एक खुशि को बटोर लिया है मैंने !!

लब्जो को दबा कर हर।
दिल मे छुपे अरमान को पनाह दी है मैंने।।






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