यह जीवन का सफर सागर जैसा है!
कभी शांत तो कभी रौद्र जैसा!!
कभी किनारे पर, अकेले हम!
जब मुड़कर देखा, घनघोर जैसा!!
लहरों में खेले तो आया मज़ा!
कुछ अंदर गए तो घुट गया दम!!
किनारे पर खड़े होकर लगा डर, देख सागर!
जब गोता लगा लिया तो आने लगा मज़ा!!
लहरों से दोस्ती कर ली है मैंने!
मैं भी आज सागर में एक लहर सा!!
चढ़ता हूं और उतरता हूं मैं!
सुबह और शाम को समझता हूं मैं!!
दोनों पहलुओं में खुश हूं मैं!
उतरता हूं तो मिलता है मोती!
और चढ़ता हूं तो लेता हूं लहरों का मज़ा!!
Thanks
Nitin Bali
nitin007bali@gmail.com
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ज़िंदगी लहरों जैसी बहती जाती है,
कभी शांत, तो कभी हलचल मचाती है।
कभी किनारे की ओर खींच लेती,
कभी गहराइयों में डुबो जाती है।
लहरों से डरकर जो किनारे पर खड़ा रहा,
वो इसके मज़े से वंचित ही रहा।
जो हिम्मत करके गोता लगा गया,
सागर का असली सौंदर्य वही जान गया।
लहरों संग बहने का जो मज़ा लिया,
ज़िंदगी को जीने का सबब मिला।
हर चढ़ाव और हर उतार को अपनाया,
हर लहर में अपने हिस्से का सुख पाया।
तो बन जाओ लहर इस ज़िंदगी के सफर में,
हर पल को जियो, हर खुशी को समेटने।