इस रात को कोई रोक लो जरा, डर रहा हूं मैं!
मेरी सोच को कोई मोड़ दो जरा, डर रहा हूं मैं !!
अपनी पहचान से झुंझ रहा हूं मैं!
जी कर भी मर रहा हूँ मैं !!
अपनी सोच को एक पिंजरे में बंद करके!
अपनी इच्छाओ से खेल रहा हूं मैं !!
खुद खुश नहीं हूं मैं!
अपने प्यार या घर बार को खुश कर रहा हूं मैं !!
लगता है कभी ना होता मैं तो अच्छा था!
क्या जीवन को आपकी सोच के ताराजू मैं तोल रहा हूं मैं !!
झूठ बोलना बंद कर दिया है मैंने!
झूठा हूं आज भी !!
किसी ओर से सच बोल कर !
खुद से झूठ बोल रहा हूं मैं !!
खुद से खफा-2 सा हूं मैं!
इस रात को कोई रोक लो जरा, डर रहा हूं मैं!!
आपको धन्यवाद ...
Nitin Bali