Thursday, August 25, 2011

Roshni Ki Kiran

 जिंदगी न तो तेरी  हे न मेरी हे!
 ये तो हर पल काली  अँधेरी हे !!

 डाल लो रौशनी का कड -२ इसमें !
 फिर क्या पता किसकी की ये दुश्मन और किसकी सहेली हे  !!

  जब करते हे अँधेरे से अपनी फरियाद आज !
  तो पता नहीं कल क्या होगा अपने साथ!!

 जब  आई जगमगाती रौशनी की बारी!
 तो घर में हुई रौशनी भरी होली और दिवाली !!

आता हे सवेरा कर के उजाला, संसार में नयी उमीदो के साथ !
पर उम्मीद हो जाती हे ख़तम एक अँधेरे के प्रभाव के साथ!!

आज भी हे  रौशनी हर दिल में किसी कोने पर छुपी हुई सी !
जो न जीतने देगी अँधेरे को किसी भी हाल में !!












































     

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