जब मरना ही हे जीवन में अपने !
तो जी कर क्यों न मरा जाये !!
जब आना हे गमो का कोहरा इसमें !
तो खुश रह कर क्यों न इसे सहा जाये!!
जब बदलता रहता हे मौसम साल में !
तो खुद को बदल -२ कर क्यों न जिया जाये !!
जब हे जीवन में बहुत उद्देश्य !
तो क्यों न एक उद्देश्य को पूरा किया जाये !!
जब बदल जाते हे लोग हर जगह पर !
तो उस जगह की तरह अपने आप को क्यों न बदला जाये !!
जब करता हे तुम्हे कोई प्यार जी जान से !
तो प्यार अपनी जी जान से ज्यादा क्यों न किया जाये !!
जब फट जाता हे आँचल गरीब का !
तो क्यों न सहायता कर उसे सिया जाये !!
जब हो मन में लालच का भंडार !
तो क्यों न पश्च्याताप से उसे धोया जाये !!
जब जीने की न बची हो आश कोई जिन्दगी में !
तो दुसरे ही आश के सहारे क्यों न जिया जाये !!
जब मरना ही हे ......................!
तो जी कर क्यों .......................!!
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